राजनीती के चक्कर में रिश्तो में खटास ना लाये

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ये तस्वीर कहाँ की है पता नहीं. बस २ दिन से वायरल हो रही है. इस तस्वीर बहुत कुछ कह रही है. पर जो चीज मुझे सबसे ज्यादा प्रभावित की वो ये है कि राजनीतिक विचारधारा और समर्थन अपनी जगह दोस्ती खत्म नहीं होनी चाहिए. ये लोकतांत्रिक देश है सबको अपने निजी विचार रखने का हक है. सम्मान करना चाहिए. कल मोदीजी का इंटरव्यू कितना स्क्रिप्टेप था नही पता. पर एक चीज अच्छी लगी कि विपक्ष के लोगों से भी उनकी मित्रता है. सुनकर अच्छा लगा कि ममता बनर्जी उनके लिए कुर्ते खरीदती है, गुलाम नवी आजाद से उनके अच्छे मित्रवत व्यवहार हैं. यही लोकतंत्र है. अटल जी भारतीय राजनीति के चुनिंदा नेताओं में से हैं जिन्हें सबसे ज्यादा इज्जत दी जाती है, और ये बात उनकी सबसे ज्यादा बताई जाती हैं कि विपक्ष भी उनका सम्मान करता था और विपक्ष के लोगो से भी उनके अच्छे सम्बन्ध थे. शत्रुघन सिंहा जब कहते है की सारी पार्टी के लोग मेरे अच्छे मित्र हैं तो सुनकर अच्छा लगता है। पिछले दस सालों में राजनीतिक समर्थकों के बीच आपस मे जिस तरह की वैमनस्य भावना आई है वो बहुत चिंता की बात है। हालांकि इसमें तमाम राजनीतिक पार्टियों और नेताओ का हाथ है वो खुद चाहते हैं कि लोगों में तल्खी बनी रहे.

कल तक जिस पार्टी को गरियाने वाले उदित राज का उनकी पार्टी ने टिकट काटा वो तुरन्त उसी पार्टी में चले गए. नेताओं में कोई दुश्मनी नही होती है. समर्थक सर फुटव्वल करते रहते हैं!

ये तस्वीर बता रही है कि किसी भी पार्टी को सपोर्ट करिए. आपसी सम्बन्ध मत खराब कीजिये. नेता एक होते हैं कटता जनता का है। राजनीतिक समर्थन के चलते जितने लोगों ने फेसबुक पर एक दूसरे से अपने सम्बन्ध खराब कर रखे हैं उनसे बड़ा मूर्ख और गधा कोई नही है. मूर्खता से बचें. अपनी अपनी पार्टी को सपोर्ट करें. वोट करें. नँगा नाचे उनके लिए पर आपसी दोस्ती बनाए रखे. नेता कुछ न देंगे दोस्त ही जरूरत पर काम आएंगे! प्रेम बनाएं रखें. पार्टियां हारती जीतती रहेंगी!

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लेखक : आशीष व्यास